बनारस के लंगड़ा आम का नाम 'लंगड़ा' क्यों पड़ा? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी
परिचय
गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आमों की बहार आ जाती है। आम को फलों का राजा कहा जाता है और जब बात आम की हो, तो 'लंगड़ा आम' का नाम सबसे पहले जुबान पर आता है। अपनी खास मिठास, बेहतरीन खुशबू और पतली गुठली के लिए मशहूर यह आम पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतने स्वाद से भरे इस आम का नाम 'लंगड़ा' क्यों पड़ा?
लंगड़ा आम का नाम 'लंगड़ा' पड़ने के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प और मशहूर कहानी है। लंगड़ा आम का इतिहास करीब 250 से 300 साल पुराना माना जाता है। इस आम की उत्पत्ति का केंद्र धार्मिक नगरी काशी (वाराणसी) को माना जाता है।यह कहानी उत्तर प्रदेश के वाराणसी (बनारस) शहर से जुड़ी है। बनारस के स्थानीय लोगों और इतिहासकारों के अनुसार, इस आम का नाम किसी वैज्ञानिक ने नहीं, बल्कि आम लोगों ने एक अनोखी घटना के बाद रखा था।
लंगड़ा आम का नाम 'लंगड़ा' कैसे पड़ा?
बनारस में एक साधु महात्मा आए थे और वह अपने साथ आम का एक छोटा सा पौधा लेकर आए थे। उन्होंने वह पौधा बनारस के एक स्थानीय मंदिर के पुजारी को दे दिया और उसकी देखरेख करने को कहा।
पुजारी ने उस पौधे को अपने आंगन में लगा दिया। कुछ सालों बाद जब उस पेड़ पर फल आए, तो वे आम बेहद रसीले, मीठे और अनोखी खुशबू वाले थे। जो भी उस आम को खाता, वह उसका दीवाना हो जाता।
धीरे-धीरे वक्त के साथ उस आम की वैरायटी का नाम ही पुजारी जी के नाम पर 'लंगड़ा आम' पड़ गया। वक्त के साथ उस आम की कलमें (Grafts) दूसरी जगहों पर भी लगाई गईं और इस वैरायटी का नाम ही हमेशा के लिए 'लंगड़ा आम' पड़ गया।
⇰ रात 12 से 3 बजे के बीच अचानक क्यों खुलती है नींद?
लंगड़ा आम की कुछ खास बातें:
दिखने में हरा: यह आम पकने के बाद भी बाहर से गहरा हरा या हल्का पीला-हरा ही दिखता है, लेकिन अंदर से इसका गूदा (pulp) गहरे नारंगी-पीले रंग का होता है।
बेहद पतली गुठली: इस आम की गुठली बहुत पतली होती है, जिसकी वजह से इसमें गूदा बहुत ज़्यादा मिलता है।
स्वाद: इसका स्वाद बेहद मीठा और थोड़ा सा तीखा-खट्टा (tangy) होता है, जो इसे बाकी आमों से अलग बनाता है।
आज यह आम सिर्फ बनारस या भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपने इस अनोखे नाम और बेहतरीन स्वाद के लिए जाना जाता है ।
एक और खास बात:
बनारस का लंगड़ा आम इतना मशहूर है कि इसे भारत सरकार की तरफ से GI Tag (Geographical Indication) भी मिला हुआ है, जो इसकी शुद्धता और बनारस की मिट्टी की पहचान को दर्शाता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें